शुक्रवार, 12 अगस्त 2022

स्व रचित कविता 'देश गान'

           स्व रचित कविता
               'देश गान'      

                                                       
आन,बान,अस्मिता के लिए लड़े लड़ाईयां,
नौनिहालों शौर्य की सुन लो वो कहानियाँ,
जय भारती जय वीरभूमि जय 
जय भारती जय वीरभूमि जय ।
 
ललकारी थीं माँएं बहने अपनी आँख के तारों को,
सौंपीं स्वर्नाभूषण,चाँदी,मंगलसूत्र गले के हारों को,
स्वाभिमान के समर में ढहा कटुता की दीवारों को,
कर में तिलक लगा पकड़ायीं  दुधारी तलवारों को.
मातृभूमि के लिए हवन कीं  हर कौम ने जवानियाँ
नौनिहालों शौर्य की सुन लो वो कहानियाँ,
जय भारती जय वीरभूमि जय 
जय भारती जय वीरभूमि जय ।

पराक्रमी मराठे जूझे थे मुगलों के अत्याचारों से,
वतन परस्ती का जज़्बा भर मतवाली हूँकारों से,
सत्ता छीनकर किया हुकूमत गोरी शुरमेदारों से,
चूलें हिला दीं थीं शूरवीरों ने इंकलाब के नारों से,
शेर शिवाजी राणा प्रताप ने दीं अपनी कुर्बानियाँ
नौनिहालों शौर्य की सुन लो वो कहानियाँ,
जय भारती जय वीरभूमि जय 
जय भारती जय वीरभूमि जय ।

की थी अंग्रेजों ने मनमानी जलियाँ वाले बाग़ में,
हल्दी घाटी में राजपुताना आयुद्ध था उन्माद में,
कूदीं हजारों पद्द्मिनियाँ जौहर होने को आग में,
कई मिसालें गौरव की हैं  इस माटी की नाभि में,
वफ़ादार चेतक की रण में चौकड़ी कलाबाजियाँ
नौनिहालों शौर्य की सुन लो वो कहानियाँ,
जय भारती जय वीरभूमि जय 
जय भारती जय वीरभूमि जय ।

सिर पे बांध तिरंगा सेहरा जाँबाज़ी दिखलाई थी,
सीने पर जाने कितनी गोली परवानों ने खाईं थीं,
देख दीवानगी वीरों की उर्वी की छाती थर्राई थी,
नयन के तारों की आहुति पे ये आज़ादी पाई थी,
खेल रक़्त की होली तोड़ीं परतन्त्रता की बेड़ियाँ
नौनिहालों शौर्य की सुन लो वो कहानियाँ,
जय भारती जय वीरभूमि जय 
जय भारती जय वीरभूमि जय ।

लहर-लहर लहराये पताका शान से स्वाभिमान की,
स्वाधीनता का महाप्रसाद ये सूरमों के बलिदान की,
ऋण तभी चुका पायेगा भारत होंठों के मुस्कान की
सीने से लगा कर रखना थाती पुरखों के सम्मान की,
चैन की बंशी बजाकर सोती आज़ादी चादर तानियाँ
नौनिहालों शौर्य की सुन लो वो कहानियाँ,
जय भारती जय वीरभूमि जय 
जय भारती जय वीरभूमि जय ।

उर्वी---धरती
सर्वाधिकार सुरक्षित 
शैल सिंह
                                                        

शुक्रवार, 10 जून 2022

पाकिस्तान की गुस्ताख़ी पर गाना

मानें नाहीं कहना पाकिस्तानी तो
सुनो हिंदुस्तानी विरना
मिटा दो इनकी नामो निशानी
देनी हो जो क़ुरबानी विरना ,

कितनी बार समझाया नहीं समझे बात ये
बार-बार करता ख़ुराफ़ात बदजात ये 
अब तो हो रहा सर से ऊपर पानी 
ऐसी करो कारस्तानी विरना
कि इनके पुरखे भी आके मांगें पानी
देनी हो जो क़ुरबानी विरना ,

मानें नाहीं कहना पाकिस्तानी तो
सुनो हिंदुस्तानी विरना
मिटा दो इनकी नामो निशानी
देनी हो जो क़ुरबानी विरना ,

जबसे मिला है जग में हिन्द को पहचान हो
तब से हुआ है पापी देखो परेशान हो
करे मिल के चीन संग शैतानी तो
बता दो होता कैसा दुश्मन जानी विरना
तुझे शेरों होगी औक़ात दिखानी
देनी हो जो क़ुरबानी विरना ,

मानें नाहीं कहना पाकिस्तानी तो
सुनो हिंदुस्तानी विरना
मिटा दो इनकी नामो निशानी
देनी हो जो क़ुरबानी विरना ।

शुक्रवार, 3 जून 2022

टूटे सब आस

 टूटे सब आस 

अमराइयाँ खिली हैं 
महुवा महका-महका रे 
मोरे जिया में आग लगाये 
पिया-पिया बोले पपीहा रे ,

कितने मौसम आये गए 
घर अजहुँ ना साजन आया 
अँखियाँ थक गयीं रस्ता तकते 
चिठिया ना सन्देशा आया ,

सखियाँ मुझसे चुहल करें 
बता पिया का हाल रे 
मोरे जिया में आग लगाये 
पिया-पिया बोले पपीहा रे ,

कोयल कूं-कूं बोले डाली 
खेतवन झूमे गेहूं बाली 
खिली-खिली पीली सरसों है 
तितली कितनी मतवाली ,

सावन के सब झूले झूलें 
मेंहदी रचा सब हाथ रे 
मोरे जिया में आग लगाये 
पिया-पिया बोले पपीहा रे ,

घर आँगन सब सूना-सूना 
काँटों भरी ये सेज लगे 
पी सौतन संग रास रचाये 
तन विरहा की आग जले ,

चुनरी मोरी धूमिल हो गयी 
टूटा जोगन का सब आस रे 
मोरे जिया में आग लगाये 
पिया-पिया बोले पपीहा रे। 

सोमवार, 30 मई 2022

चाँद की करामात

             चाँद की करामात 


मुखड़ा दिखावे चाँद बदरा की ओट से
लुका-छिपी करे ओढ़ि घटा की चुनरिया ।

कांहें तड़पावे,तरसावे मोहें मुस्काई के
हे रही-रही टीस उठे जाईं जब सेजरिया । 

हमका रिझाई करे चन्द्रिका से बतिया
अँखिया मिलावे कब्बों फेरि ले नज़रिया ।

देखि ई निराला प्रेम करवट कटे रतिया
नयनवां से लोर ढूरे जईसे बरसे बदरिया ।

बलमा अनाड़ी नाहीं  बूझे मोरे मन की
निंदिया बेसुध सोवे मुँहें तानिके चदरिया ।

केहू तरे सुते जब जाईं दियरा बुझाई के 
करें रास चंदा,चकोर बैठि हमरे अटरिया । 

देखि जर जाय देह बेख़बर निर्दइया के 
झरोखवा के झिरी जब झाँके अँजोरिया । 

हियरा के गूंढ़ बात कहीं हम केकरा से
अस केहु होत लेत तनि हमरो खबरिया ।

होत भिनुसार चलि गईले पिउ परदेशे
सुसुकि रोईलां मुँह दाब अँचरा संवरिया ।

                     शैल सिंह 



कितना सूनापन

कितना सूनापन


छोटा सा परिवार हमारा
हरा-भरा संसार हमारा ,
हँसी,ख़ुशी,किलकारी से
गूँजा करता घर ओसारा ,

एक दिन चहल-पहल घर 
भरल रहल लईकन से 
कोना-कोना ताख झरोखा 
सजल रहल खाता बहियन से 
खूंटी अँगना अलगनी बिछौना 
लदरल रहल नरखा अंगियन से 
कोठरी,अँगना,दालान,दुआर   
भरल रहल बिछल खटियन से 
आज उहै नज़ारा ख़ोजत हईं हम 
अपने दुई सुनी अँखियन से ,

बाबुल घर से विदा लाड़ली 
भईल जुदा संगी संखियन से 
चहकत चिरई फ़ुर्र हो गईल 
छोड़ चलल डाली बगियन के 
चाकरि खातिर देश पराये 
बबुवा दूर भईल हमहिन से 
बिखर गईल माला की भांति 
एक-एक मोती लड़ियन से 
आज उहै नज़ारा ख़ोजत हईं हम 
अपने दुई सुनी अँखियन से ,

गुड्डा,गुड़िया सब छू मन्तर  
हो गईल हमरे अल्मरियन से 
होली,दीवाली,पर्व,दशहरा 
रूठ गईल हमरी ख़ुशियन से 
तस्वीरन से जी बहलाईं कसहुँ
निंदिया रूठ गईल रतियन से 
बईठ के ड्योढ़ी बाट निहारीं
कब लगईबैं अंकवरियन से 
आज उहै नज़ारा ख़ोजत हईं हम 
अपने दुई सुनी अँखियन से। 

शैल सिंह 






गुरुवार, 26 मई 2022

संतानका विछोह

संतान का विछोह 


सुना लागे घरवा मोरा झनके अंगनवां 
दूर देशे पढ़े गइले सुगनी औ सुगनवां
तनिको ना लागे मनवां छछने परनवां 
दूनों रे झुनझुनवां बिना छछने परनवां,दूनों रे ….।

माई के अंचरवा नियर कहाँ मिली छाँह हो
बाबा के दुलरवा नियर कहाँ मिली बाँह हो
करकेले छतिया मोरी कइसे होइहें दूनों थतिया मोरी 
के दिहें पानी दनवां दूनों रे झुनझुनवां बिना छछने परनवां,दूनों रे ….।

बबुवा लिखी भेजें पतिया बबुनी करे टेलीफोनवां 
धीर धरा एक दिन माई चहकी तोर अंगनवां 
हमनी के संवारे ख़ातिर कांहे अँखियाँ देखें आख़िर 
झिलमिल सपनवां दूनों रे झुनझुनवां बिना छछने परनवां,दूनों रे ….।


सोमवार, 14 मार्च 2022

सीमा पर तैनात जवान की पत्नी का दर्द होली पर

सीमा पर तैनात जवान की पत्नी का दर्द होली पर


अबके बरस कईसे खेलब होली
मोरे पिया परदेश रे सखी।

सावन बीतो फागुन नकिचायो
खोज न खबर पाती सन्देश आयो
सखी कवन सवत संग साजन लोभायो
उठत हिया में हिलोर रे सखी
मोरे पिया ..........।

सब गोरी पिया संग रास रचावें
गोदी में ललन कभी पलना झुलावें
सखी काँट भरी सेजिया अगन धधकावे
झंखी कागा मुड़ेरवां उड़ाऊं रे सखी
मोरे पिया ..........।

बखरी ओसारी अजगर जस दिखे
कढ़ी पकवान खांटी निमियां सरीखे
सखी ससुइ-ननद बोल वाण जईसे तीखे
ठिठोली संग देवरा ना भावे रे सखी
मोरे पिया ...........।

बनी के पहरूवा सरहदवा प ठाढ़े
कस-कस मनवां अंदेशा उठत बाड़े
सखी कवनों जतन करीं भितरां दहाड़े
कस ई सिपाही के चाकरी रे सखी
मोरे पिया ............।

केहू लूटत बाटे दिन-रात लहरा
जनवा हथेली रख पिया देत पहरा
सजी डोलिया पिया के आईल दुवरा सखी
मोरी लूटी गईलीं सगरी सिंगार रे सखी
मोरे पिया .............।  

अबके बरस कईसे खेलब होली
दूर बहुत दूर पिया परदेश रे सखी ।