शुक्रवार, 24 अक्टूबर 2025

शबरी भजन

बस गये मन में राम शबरी करती है ध्यान
ध्यान में राम राम बस मन में राम नाम बस गये ----।

लम्बे केश खोल राह झाड़ती बुहारती 
आस में बिछाये आँख राह है निहारती 
इस राह चलके आयेंगे विश्वास है भगवान बस गये ---
ध्यान में राम राम बस मन में राम नाम ,बस गये ----।

जंगलों से तोड़ बेर फांड़ भर लाती
चख के मीठे-मीठे बेर दोनियां सजाती 
करेंगे भोग प्रेम से विश्वास है भगवान,बस गये ----
ध्यान में राम राम बस मन में राम नाम बस गये ----।

कुश की चटाई शबरी नेह से संवारती 
मगन हो भजती राम नाम राम को पुकारती 
करेंगे धन्य आसन विश्वास है श्रीराम,बस गये ----
ध्यान में राम राम ब राम नाम मन में बस गये ----।

शैल सिंह 


 



मंगा द रंग केसरिया पिया ना,

आज की हवा बड़ी सुहानी लग रही है 
           कैसे ना बहूँ सुनामी की इस लहर में 
           ये सुनामी भी बड़ी रूहानी लग रही है 
           ख़ुशियों पर अंकुश लगाना बड़ा मुश्किल 
           ये लहर भी विरोधियों को कहानी लग रही है ।

जैसे कि——-

भगवा रंग में हम रंगाईब चुनरिया पिया
मंगा द रंग केसरिया पिया ना

ले हाथे में कमल क झंडा 
जाईब हम नहाये गंगा
जी भर देखबैं काशी हम नगरिया पिया
मंगा द रंग केसरिया पिया ना,

सुनके बाबा क प्रचंड जीत 
बजाईब ढोल गाईब गीत 
जाके बुलडोज़र बाबा के शहरिया पिया
मंगा द रंग केसरिया पिया ना,

ख़रीद दा एक ठो गाड़ी
रंग केसरिया पहिनी साड़ी
दौड़ाईब वेग में चतुर्भुज डगरिया पिया
मंगा द रंग केसरिया पिया ना,

अबहीं त बाटे होली दूर
जनता जीत के नशा में चूर
भरि मारे हैं गुलाल पिचकारिया पिया
मंगा द रंग केसरिया पिया ना,

बहे अईसने बयार जुग-जुग 
चढ़े अईसने ख़ुमार जुग-जुग 
रहे अईसने भगवा क लहरिया पिया 
मंगा द रंग केसरिया पिया ना,

यूपी में कहे का बा नेहवा
देखले आ बाबा क जलवा
जाई चकरा अन्हरो क नज़रिया पिया
मंगा द रंग केसरिया पिया ना,

चतुर्भुज---एक्सप्रेस हाईवे
 
                               शैल सिंह

होली गीत



गाल मलो ना गुलाल मोरे बांके रसिया
हँसेगी रूप देखी देखि  म्हारो सारी संखिया,

ना करो बरिजोरी ना कलईया मरोरो
भरी-भरी चूड़ी  हाथ कांच की ना तोरो
दूर बाट होती  रात बरसाने  घर मोरो
छोड़ो ना डगर यॆ  डरावे कारी रतिया
हँसेगी रुप…… ।

रैना अँधेरी बिजुरी चम-चम चमके
कैसे आऊं चोरी पायल छन-छनके
नन्द गली में ठाढ़े ग्वाले बन-ठनके
घर-घर होगी जाने कित-कित बतिया
हँसेगी ...............।

कारो-कारो बदरा बरस रह्यो रूम-झूम
जिया भरमावे है बंसुरिया मधुर धुन
छैल-छबीला करे जादू,टोना चुन-चुन
धीर नाहीं नींद नैना मारी गयी मतिया
हँसेगी ...............।

सोमवार, 1 सितंबर 2025

मीरा भजन

मैं तो चली वृन्दावन धाम 
जहां मेरे श्याम पिया का गांव 
कि आग लगे राणा तेरे महलों में -३
तूमने जो भेजा राणा विष का प्याला
पी गई हंस हंस रट गिरधर की माला
ना मैं चाहूं महला दुमहला अटारी
मन में तो बसा बस मेरा बनवारी 
राजपाट सब छोड़ छाड़कर
लाज शरम तोड़ निकले पांव ,कि आग लगे राणा------
मैं तो चली ------
लगी धुन श्याम की बन गई जोगन
रत हरि भजन में निमग्न मगन मन
कुछ लोग कहें मोहे पगली दीवानी 
देखो बावरी हो गई महलों की रानी 
ले कर करतल एकतारा भजूं श्याम 
गम नहीं दुनिया करे बदनाम,कि आग लगे राणा -----
मैं तो चली -------
मीरा कर गई जग में नाम अमर
भक्तिरस का निर्मल भाव परस कर
युगों-युगों तक सुमिरेगा हर प्राणी 
मीरा की प्रेमरस भीगी अमृत वाणी
मैं भी आई प्रभु तेरे शरण चरण में  
दे दो मुझको भी वृन्दावन ठांव
कि बसा के रखूं निस दिन नयनों में 
मैं तो चली वृन्दावन धाम 
जहां मेरे श्याम पिया का गांव 
कि आग लगे राणा तेरे महलों में -३