मंगलवार, 25 अगस्त 2026

कवने कुसुरवा बाबा कईला कुलारी हो


नैना रतनारी ढूरे अबहीं बानी सुकुमारी हो
कईसे क सहाई दुःखवा मन अति भारी हो । 

गवना के सुदिनवां आईल दिन दुई चारी हो 
नईहर के नगरिया छूटी बाबा के ओसारी हो 
सुपली मऊनियां छूटिहें ,सखी सहेलारी हो 
पोखरा इनरवा छूटिहें ,छूटिहें फुलवारी हो । 

दुवरा पर आईल डोली जाएके ससुरारी हो 
आवा अम्मा धई लीहीं तोहे अँकवारी हो 
सुबुकि-सुबुकि कहें अम्मा के दुलारी हो 
आँखि के पुतरिया काहे दिहलू बिसारी हो । 

सजन कंहरवा संग बईठेलं मोहारी हो 
आवा चाची धई लीहीं तोहे अँकवारी हो 
बभना मुहूरत काढ़े पोथिया उचारी हो 
आवा भऊजी भरी लीहीं तोहे अँकवारी हो । 

छछनि छछनि रोवें ओहार टारी टारी हो 
नीमि के चिरईया काहें दिहला ऊढ़ारि हो  
कवने कुसुरवा बाबा कईला कुलारी हो 
विरना के दिहला काहें महल अटारी हो । 
                                                            शैल सिंह

बुधवार, 25 मार्च 2026

भजन

रम जाऊं मगन हो तेरे भजन में 
अपनी कृपा बरसा दो अम्बे मां
वास करो आ हृदय कुन्ज में मेरे
अपनी सेविका बना लो अम्बे मां ।।

दुःख दर्द हरो मन का खड्ग खप्पर वाली मां
गुणगान करूं तेरा अन्नपूर्णा अम्बे भवानी मां
रूप अनेकों तेरे तूं है आदिशक्ति की अवतार 
अपरम्पार है तेरी महिमा   
मिटा दे मन का अंधियार ।।

हर भक्त डूबा भक्ति में सजा के चौकी चौबारा
तेरे नाम की घण्टी बाजे हर घर गूंजे जयकारा 
सुख समृद्धि से भर आंचल फले फूले परिवार 
संसार झुका तेरे चरणों में 
कर दे नई उर्जा का संचार ।।

तेरे दरबार से जाऊं ना खाली भर दे झोली मां
वंश बेलि बढ़ा मेरी अब तक बहुत हूॅं रो ली मां
वंदना करो स्वीकार करो लाचार खड़ी तेरे द्वार 
मंझधार फंसी मेरी नैया 
मां तारिणी लगा दे पार ।।

मेरे सोये भाग्य जगा दो इक तुझसे आसरा मां
अवगुण देखो न मेरे मैं निर्गुणिया कालिका मां
सर्वशक्तिमान कल्याणी नारायणी ज्योतांवाली 
दरश दो खोल किवाड़
खोलो किस्मत के द्वार ।।

शैल सिंह 
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