नैना रतनारी ढूरे अबहीं बानी सुकुमारी हो
कईसे क सहाई दुःखवा मन अति भारी हो ।
गवना के सुदिनवां आईल दिन दुई चारी हो
नईहर के नगरिया छूटी बाबा के ओसारी हो
सुपली मऊनियां छूटिहें ,सखी सहेलारी हो
पोखरा इनरवा छूटिहें ,छूटिहें फुलवारी हो ।
दुवरा पर आईल डोली जाएके ससुरारी हो
आवा अम्मा धई लीहीं तोहे अँकवारी हो
सुबुकि-सुबुकि कहें अम्मा के दुलारी हो
आँखि के पुतरिया काहे दिहलू बिसारी हो ।
सजन कंहरवा संग बईठेलं मोहारी हो
आवा चाची धई लीहीं तोहे अँकवारी हो
बभना मुहूरत काढ़े पोथिया उचारी हो
आवा भऊजी भरी लीहीं तोहे अँकवारी हो ।
छछनि छछनि रोवें ओहार देली टारी हो
नीमि के चिरईया काहें दिहला ऊढ़ारि हो
कवने कुसुरवा बाबा कईला कुलारी हो
विरना के दिहला काहें महल अटारी हो ।
शैल सिंह
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