शुक्रवार, 24 अक्टूबर 2025

होली गीत



गाल मलो ना गुलाल मोरे बांके रसिया
हँसेगी रूप देखी देखि  म्हारो सारी संखिया,

ना करो बरिजोरी ना कलईया मरोरो
भरी-भरी चूड़ी  हाथ कांच की ना तोरो
दूर बाट होती  रात बरसाने  घर मोरो
छोड़ो ना डगर यॆ  डरावे कारी रतिया
हँसेगी रुप…… ।

रैना अँधेरी बिजुरी चम-चम चमके
कैसे आऊं चोरी पायल छन-छनके
नन्द गली में ठाढ़े ग्वाले बन-ठनके
घर-घर होगी जाने कित-कित बतिया
हँसेगी ...............।

कारो-कारो बदरा बरस रह्यो रूम-झूम
जिया भरमावे है बंसुरिया मधुर धुन
छैल-छबीला करे जादू,टोना चुन-चुन
धीर नाहीं नींद नैना मारी गयी मतिया
हँसेगी ...............।

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें