शुक्रवार, 24 अक्टूबर 2025

मंगा द रंग केसरिया पिया ना,

आज की हवा बड़ी सुहानी लग रही है 
           कैसे ना बहूँ सुनामी की इस लहर में 
           ये सुनामी भी बड़ी रूहानी लग रही है 
           ख़ुशियों पर अंकुश लगाना बड़ा मुश्किल 
           ये लहर भी विरोधियों को कहानी लग रही है ।

जैसे कि——-

भगवा रंग में हम रंगाईब चुनरिया पिया
मंगा द रंग केसरिया पिया ना

ले हाथे में कमल क झंडा 
जाईब हम नहाये गंगा
जी भर देखबैं काशी हम नगरिया पिया
मंगा द रंग केसरिया पिया ना,

सुनके बाबा क प्रचंड जीत 
बजाईब ढोल गाईब गीत 
जाके बुलडोज़र बाबा के शहरिया पिया
मंगा द रंग केसरिया पिया ना,

ख़रीद दा एक ठो गाड़ी
रंग केसरिया पहिनी साड़ी
दौड़ाईब वेग में चतुर्भुज डगरिया पिया
मंगा द रंग केसरिया पिया ना,

अबहीं त बाटे होली दूर
जनता जीत के नशा में चूर
भरि मारे हैं गुलाल पिचकारिया पिया
मंगा द रंग केसरिया पिया ना,

बहे अईसने बयार जुग-जुग 
चढ़े अईसने ख़ुमार जुग-जुग 
रहे अईसने भगवा क लहरिया पिया 
मंगा द रंग केसरिया पिया ना,

यूपी में कहे का बा नेहवा
देखले आ बाबा क जलवा
जाई चकरा अन्हरो क नज़रिया पिया
मंगा द रंग केसरिया पिया ना,

चतुर्भुज---एक्सप्रेस हाईवे
 
                               शैल सिंह

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