बुधवार, 25 मार्च 2026

भजन

रम जाऊं मगन हो तेरे भजन में 
अपनी कृपा बरसा दो अम्बे मां
वास करो आ हृदय कुन्ज में मेरे
अपनी सेविका बना लो अम्बे मां ।।

दुःख दर्द हरो मन का खड्ग खप्पर वाली मां
गुणगान करूं तेरा अन्नपूर्णा अम्बे भवानी मां
रूप अनेकों तेरे तूं है आदिशक्ति की अवतार 
अपरम्पार है तेरी महिमा   
मिटा दे मन का अंधियार ।।

हर भक्त डूबा भक्ति में सजा के चौकी चौबारा
तेरे नाम की घण्टी बाजे हर घर गूंजे जयकारा 
सुख समृद्धि से भर आंचल फले फूले परिवार 
संसार झुका तेरे चरणों में 
कर दे नई उर्जा का संचार ।।

तेरे दरबार से जाऊं ना खाली भर दे झोली मां
वंश बेलि बढ़ा मेरी अब तक बहुत हूॅं रो ली मां
वंदना करो स्वीकार करो लाचार खड़ी तेरे द्वार 
मंझधार फंसी मेरी नैया 
मां तारिणी लगा दे पार ।।

मेरे सोये भाग्य जगा दो इक तुझसे आसरा मां
अवगुण देखो न मेरे मैं निर्गुणिया कालिका मां
सर्वशक्तिमान कल्याणी नारायणी ज्योतांवाली 
दरश दो खोल किवाड़
खोलो किस्मत के द्वार ।।

शैल सिंह 
सर्वाधिकार सुरक्षित 







शुक्रवार, 24 अक्टूबर 2025

शबरी भजन

बस गये मन में राम शबरी करती है ध्यान
ध्यान में राम राम बस मन में राम नाम बस गये ----।

लम्बे केश खोल राह झाड़ती बुहारती 
आस में बिछाये आँख राह है निहारती 
इस राह चलके आयेंगे विश्वास है भगवान बस गये ---
ध्यान में राम राम बस मन में राम नाम ,बस गये ----।

जंगलों से तोड़ बेर फांड़ भर लाती
चख के मीठे-मीठे बेर दोनियां सजाती 
करेंगे भोग प्रेम से विश्वास है भगवान,बस गये ----
ध्यान में राम राम बस मन में राम नाम बस गये ----।

कुश की चटाई शबरी नेह से संवारती 
मगन हो भजती राम नाम राम को पुकारती 
करेंगे धन्य आसन विश्वास है श्रीराम,बस गये ----
ध्यान में राम राम ब राम नाम मन में बस गये ----।

शैल सिंह 


 



मंगा द रंग केसरिया पिया ना,

आज की हवा बड़ी सुहानी लग रही है 
           कैसे ना बहूँ सुनामी की इस लहर में 
           ये सुनामी भी बड़ी रूहानी लग रही है 
           ख़ुशियों पर अंकुश लगाना बड़ा मुश्किल 
           ये लहर भी विरोधियों को कहानी लग रही है ।

जैसे कि——-

भगवा रंग में हम रंगाईब चुनरिया पिया
मंगा द रंग केसरिया पिया ना

ले हाथे में कमल क झंडा 
जाईब हम नहाये गंगा
जी भर देखबैं काशी हम नगरिया पिया
मंगा द रंग केसरिया पिया ना,

सुनके बाबा क प्रचंड जीत 
बजाईब ढोल गाईब गीत 
जाके बुलडोज़र बाबा के शहरिया पिया
मंगा द रंग केसरिया पिया ना,

ख़रीद दा एक ठो गाड़ी
रंग केसरिया पहिनी साड़ी
दौड़ाईब वेग में चतुर्भुज डगरिया पिया
मंगा द रंग केसरिया पिया ना,

अबहीं त बाटे होली दूर
जनता जीत के नशा में चूर
भरि मारे हैं गुलाल पिचकारिया पिया
मंगा द रंग केसरिया पिया ना,

बहे अईसने बयार जुग-जुग 
चढ़े अईसने ख़ुमार जुग-जुग 
रहे अईसने भगवा क लहरिया पिया 
मंगा द रंग केसरिया पिया ना,

यूपी में कहे का बा नेहवा
देखले आ बाबा क जलवा
जाई चकरा अन्हरो क नज़रिया पिया
मंगा द रंग केसरिया पिया ना,

चतुर्भुज---एक्सप्रेस हाईवे
 
                               शैल सिंह

होली गीत



गाल मलो ना गुलाल मोरे बांके रसिया
हँसेगी रूप देखी देखि  म्हारो सारी संखिया,

ना करो बरिजोरी ना कलईया मरोरो
भरी-भरी चूड़ी  हाथ कांच की ना तोरो
दूर बाट होती  रात बरसाने  घर मोरो
छोड़ो ना डगर यॆ  डरावे कारी रतिया
हँसेगी रुप…… ।

रैना अँधेरी बिजुरी चम-चम चमके
कैसे आऊं चोरी पायल छन-छनके
नन्द गली में ठाढ़े ग्वाले बन-ठनके
घर-घर होगी जाने कित-कित बतिया
हँसेगी ...............।

कारो-कारो बदरा बरस रह्यो रूम-झूम
जिया भरमावे है बंसुरिया मधुर धुन
छैल-छबीला करे जादू,टोना चुन-चुन
धीर नाहीं नींद नैना मारी गयी मतिया
हँसेगी ...............।

सोमवार, 1 सितंबर 2025

मीरा भजन

मैं तो चली वृन्दावन धाम 
जहां मेरे श्याम पिया का गांव 
कि आग लगे राणा तेरे महलों में -३
तूमने जो भेजा राणा विष का प्याला
पी गई हंस हंस रट गिरधर की माला
ना मैं चाहूं महला दुमहला अटारी
मन में तो बसा बस मेरा बनवारी 
राजपाट सब छोड़ छाड़कर
लाज शरम तोड़ निकले पांव ,कि आग लगे राणा------
मैं तो चली ------
लगी धुन श्याम की बन गई जोगन
रत हरि भजन में निमग्न मगन मन
कुछ लोग कहें मोहे पगली दीवानी 
देखो बावरी हो गई महलों की रानी 
ले कर करतल एकतारा भजूं श्याम 
गम नहीं दुनिया करे बदनाम,कि आग लगे राणा -----
मैं तो चली -------
मीरा कर गई जग में नाम अमर
भक्तिरस का निर्मल भाव परस कर
युगों-युगों तक सुमिरेगा हर प्राणी 
मीरा की प्रेमरस भीगी अमृत वाणी
मैं भी आई प्रभु तेरे शरण चरण में  
दे दो मुझको भी वृन्दावन ठांव
कि बसा के रखूं निस दिन नयनों में 
मैं तो चली वृन्दावन धाम 
जहां मेरे श्याम पिया का गांव 
कि आग लगे राणा तेरे महलों में -३




बुधवार, 26 जुलाई 2023

आजा घर परदेशी करती निहोरा 

आजा घर परदेशी करती निहोरा 

सावन  की  कारी  बदरिया  पिया 

तेरी यादों का विष पी  नागिन हुई ।


नाचें मयूरी मोर पर फहरा-फहरा 

पिउ-पिउ बोले वन पापी पपिहरा 

कुहुके कोयलिया हूक उठे हियरा

दहकावे तन-वदन निरमोही बदरा 

सावन की विरही  कजरिया पिया 

तेरी यादों का विष पी  नागिन हुई ।


सुध-बुध दिये सकल पिया बिसरा 

नैना से लोर ढूरे बहि जाये कजरा 

झूला न कजरी सखिन संग लहरा 

चिन्ता अंदेशा में काया गई पियरा

सावन की  टिसही सेजरिया पिया 

तेरी यादों का  विष पी नागिन हुई ।


बौरा बरसाये नभ झर-झर फुहरा 

सिहरे कलेजा भींजा जाये अंचरा 

भावे ना रूपसज्जा सिंगार गजरा 

आजा घर परदेशी करती निहोरा 

सावन की कड़के बिजुरिया पिया 

तेरी यादों का विष पी  नागिन हुई ।


उड़-उड़ बैइठे कागा छज्जे मुँड़ेरा 

चिट्ठी ना संदेश दे शूल चुभे गहरा 

बाबा सुदिन टार फेरि दिये कंहरा 

लागे ना नैहर में कंत बिना जियरा 

सावन की पिहके पिरितिया पिया 

तेरी यादों का  विष पी नागिन हुई ।

सर्वाधिकार सुरक्षित 

शैल सिंह 











शनिवार, 25 फ़रवरी 2023

लयवद्ध गीत मादक वसंत पर ठेठ भोजपुरी में वसन्त की महिमा का साक्षात् वर्णन                             

 

लयवद्ध गीत मादक वसंत पर 

ठेठ भोजपुरी में वसन्त की महिमा का साक्षात् वर्णन 
                            

करें बाग़ बगईचा सिंगार
सुदिनवां वसन्त ले अइले
खेतवा सेठानी लगे ओढ़ी धानी चुनरी 
परदेशी पीत सखी कंत घरे अइले ,

सुरमई साँझ लगे नववधू वसुधा
सूरजमुखी के बढ़ी गए बड़ा रुतबा
विलक्षण उपहार लेके अइले ऋतुराज
नवगंध,नवपल्लव,नवकुसुम,नवगात
हरी-भरी वादी में परकृति छेड़े सरगम
प्रणय निवेदन करि प्रेमी करें प्रहसन ,

सूखी-सूखी टहनी पे लदी गए पत्र दल 
अमुवा बऊराईल बउरि डार-डार 
मह-मह महके दिशा-दिशा महुवा
निमिया फुलाईलि गहबर झार 
गुन-गुन भंवरा करेला गुंजार 
देखि-देखि गांछी-गांछी फुलवा के हार ,

उड़ेला विहंग देखा खुले आसमनवा
सेमल नारंगी रंग रंगवले वदनवां 
टेढ़े-मेढ़े ढाक तन फूटीं भूरि कलियाँ
लाल,नवरंग में देखावेलं जवानियाँ
कैथा कुरूप लीपले ऋतू के प्रसाधन
वनवा विटप लागे जईसे सुहागन ,

पाते-पाते डारि-डारि कूके कोइलरिया 
रास-रंग में मगन नाचे मोरवा चिरईया  
बगुला उजर घूमे खेत-खलिहान में 
पपीहा की पिया रट गूंजे है जहान में 
रतिया चंदनिया सजावेले दूकान 
बड़ा नीक लागे मधुऋतु के विहान ,

भइलीं उन्मादी कस तितली,बरैया
मधुमक्खी लूटी रस लेलीं बलैया
हरियर झबला में लाल ठोर सुअवा
उड़ि-उड़ि बइठेला मकई के मुड़वा
लह-लह फसल निरेखेला किसान
जागि के अगोरे खेत डालि के मचान ,

पित वसन धारि ठसके सरसोईया 
गेंहुँवा क बाली झूमे सनकल केरईया 
चनवा जवानी चढ़ल सहकेले जईया 
मकई से रेस में रहर मोरी दईया 
डोलिया सजावे लागल पुरुवा बयार 
काटे चिटुकी ठिठोली करे पछुवा छिनार ,

झपसी-झपसी लहरावे चूल मौलश्री
दुवरा पर गमकेला हरसिंगार 
मेंहदी के पतवा से झहरेला ख़ुश्बू 
लचे चरर-मरर गरे लग बंसवार 
बबुल,शीशम के गाछ रिझ सुगुनी 
जले बुझे,उड़े सांझि-राते भगजुगुनी ,

कईसे कहीं लाज लागे कली कचनार
कांची उमर मुस्की बरछी कटार
मटके प्रभंजन पेन्हि घघरा लहरिया
काढ़ि रंग-बिरंग कसीदा किनरिया
पीपरा के पात पर डोले पुरईनिया
सगरी जहान लगे नई दुलहिनिया ,

पोतल लिपल देखि घर के देवाल
सुघड़ रंगोली खांचल मनवां निहाल
गउँवा की देहिया ग़जब चित्रकारी
कचरी,बड़ी सूखे पापड़ अंगना दुवारी
मड़ई के माथ पर सवार लौकी,कोंहड़ा
तोरई ,भिंडी चिंचिढ़ा लगवले जमवड़ा ,

लरके लतर देखा सेमिया के भार से
पलकी चौराई हँसे ओसिया के प्यार से
मधुमासी जोबना सवति जस लागे
जले भूने लाल रंग मरचा पोता के
धनिया ग़दर करे झझके पोदिनवा
गोभीया कनखि मारे मातल बैगनवा ,

टमाटर लाले अभरन में ढावेलीं गज़ब
करें मुरई अँइठी मूँछ खीरा से तलब
माछी बिछिलाय तरकरियन के अंग पर
तंज कसें खिसिया के करैला के ढंग पर
बेसर अस लागे सहजन के झुलनियाँ
बीन ,बोड़ो नाक लटकवलीं नथनियाँ ,

सोनचंपा के भीना गंध करे है बेहाल
खोलें विहँसी घूँघट पट गेंदा गुलाब
सुगन्धराज देखें अंग दरपन संवार के
रंगन,टगर काकुल ज़ुल्फी में काढ़ के
दिनवा बहुरले गईले भाग पतझार
गावें घट-घट हिली-मिली मंगलचार ,

जामुन सियावें लहंगा चोली छींटदार
कटहल ,बड़हल में भईल तक़रार
धतूरा,बेल,बईर के केतना रूआब बा
शिव रज चढ़ी मानो पवले सुराज बा
चंवर डोलवले ऋतुराज चहुँओर
छइलल नागफ़नी होईके विभोर ,

रातरानी झाँपि चलें अपनो अँचरवा
पगड़ी उछालें अढ़उलवा,कनेरवा
चम्पा,चमेली,बेला हँसे ठट्ठा मारि के
फूटलीं किरिन मांग भरी के सेनुरवा
ओस में नहाके निखरे दूब ,घसिया
मकरन्द चूस मस्त भये केत्ते रसिया ,

कशिया के भुवा खुलल भईल मुँहजोर
जोर नाहीं चले उड़े मन का चकोर
कुसुमी चदरिया के तानि के ओहार
टह-टह टेसू बरसे फाग के फुहार
हरषित सुहासित भइल मादक जवार
बुढ़वन पर चढ़ल जवानी के बोखार ,

करें बाग़ बगईचा सिंगार
सुदिनवां वसन्त ले अइले
खेतवा सेठानी लगे ओढ़ी धानी चुनरी 
परदेशी पीत सखी कंत घरे अइले ।