मंगलवार, 25 अगस्त 2026

कवने कुसुरवा बाबा कईला कुलारी हो


नैना रतनारी ढूरे अबहीं बानी सुकुमारी हो
कईसे क सहाई दुःखवा मन अति भारी हो । 

गवना के सुदिनवां आईल दिन दुई चारी हो 
नईहर के नगरिया छूटी बाबा के ओसारी हो 
सुपली मऊनियां छूटिहें ,सखी सहेलारी हो 
पोखरा इनरवा छूटिहें ,छूटिहें फुलवारी हो । 

दुवरा पर आईल डोली जाएके ससुरारी हो 
आवा अम्मा धई लीहीं तोहे अँकवारी हो 
सुबुकि-सुबुकि कहें अम्मा के दुलारी हो 
आँखि के पुतरिया काहे दिहलू बिसारी हो । 

सजन कंहरवा संग बईठेलं मोहारी हो 
आवा चाची धई लीहीं तोहे अँकवारी हो 
बभना मुहूरत काढ़े पोथिया उचारी हो 
आवा भऊजी भरी लीहीं तोहे अँकवारी हो । 

छछनि छछनि रोवें ओहार टारी टारी हो 
नीमि के चिरईया काहें दिहला ऊढ़ारि हो  
कवने कुसुरवा बाबा कईला कुलारी हो 
विरना के दिहला काहें महल अटारी हो । 
                                                            शैल सिंह

बुधवार, 25 मार्च 2026

भजन

रम जाऊं मगन हो तेरे भजन में 
अपनी कृपा बरसा दो अम्बे मां
वास करो आ हृदय कुन्ज में मेरे
अपनी सेविका बना लो अम्बे मां ।।

दुःख दर्द हरो मन का खड्ग खप्पर वाली मां
गुणगान करूं तेरा अन्नपूर्णा अम्बे भवानी मां
रूप अनेकों तेरे तूं है आदिशक्ति की अवतार 
अपरम्पार है तेरी महिमा   
मिटा दे मन का अंधियार ।।

हर भक्त डूबा भक्ति में सजा के चौकी चौबारा
तेरे नाम की घण्टी बाजे हर घर गूंजे जयकारा 
सुख समृद्धि से भर आंचल फले फूले परिवार 
संसार झुका तेरे चरणों में 
कर दे नई उर्जा का संचार ।।

तेरे दरबार से जाऊं ना खाली भर दे झोली मां
वंश बेलि बढ़ा मेरी अब तक बहुत हूॅं रो ली मां
वंदना करो स्वीकार करो लाचार खड़ी तेरे द्वार 
मंझधार फंसी मेरी नैया 
मां तारिणी लगा दे पार ।।

मेरे सोये भाग्य जगा दो इक तुझसे आसरा मां
अवगुण देखो न मेरे मैं निर्गुणिया कालिका मां
सर्वशक्तिमान कल्याणी नारायणी ज्योतांवाली 
दरश दो खोल किवाड़
खोलो किस्मत के द्वार ।।

शैल सिंह 
सर्वाधिकार सुरक्षित 







शुक्रवार, 24 अक्टूबर 2025

शबरी भजन

बस गये मन में राम शबरी करती है ध्यान
ध्यान में राम राम बस मन में राम नाम बस गये ----।

लम्बे केश खोल राह झाड़ती बुहारती 
आस में बिछाये आँख राह है निहारती 
इस राह चलके आयेंगे विश्वास है भगवान बस गये ---
ध्यान में राम राम बस मन में राम नाम ,बस गये ----।

जंगलों से तोड़ बेर फांड़ भर लाती
चख के मीठे-मीठे बेर दोनियां सजाती 
करेंगे भोग प्रेम से विश्वास है भगवान,बस गये ----
ध्यान में राम राम बस मन में राम नाम बस गये ----।

कुश की चटाई शबरी नेह से संवारती 
मगन हो भजती राम नाम राम को पुकारती 
करेंगे धन्य आसन विश्वास है श्रीराम,बस गये ----
ध्यान में राम राम ब राम नाम मन में बस गये ----।

शैल सिंह 


 



मंगा द रंग केसरिया पिया ना,

आज की हवा बड़ी सुहानी लग रही है 
           कैसे ना बहूँ सुनामी की इस लहर में 
           ये सुनामी भी बड़ी रूहानी लग रही है 
           ख़ुशियों पर अंकुश लगाना बड़ा मुश्किल 
           ये लहर भी विरोधियों को कहानी लग रही है ।

जैसे कि——-

भगवा रंग में हम रंगाईब चुनरिया पिया
मंगा द रंग केसरिया पिया ना

ले हाथे में कमल क झंडा 
जाईब हम नहाये गंगा
जी भर देखबैं काशी हम नगरिया पिया
मंगा द रंग केसरिया पिया ना,

सुनके बाबा क प्रचंड जीत 
बजाईब ढोल गाईब गीत 
जाके बुलडोज़र बाबा के शहरिया पिया
मंगा द रंग केसरिया पिया ना,

ख़रीद दा एक ठो गाड़ी
रंग केसरिया पहिनी साड़ी
दौड़ाईब वेग में चतुर्भुज डगरिया पिया
मंगा द रंग केसरिया पिया ना,

अबहीं त बाटे होली दूर
जनता जीत के नशा में चूर
भरि मारे हैं गुलाल पिचकारिया पिया
मंगा द रंग केसरिया पिया ना,

बहे अईसने बयार जुग-जुग 
चढ़े अईसने ख़ुमार जुग-जुग 
रहे अईसने भगवा क लहरिया पिया 
मंगा द रंग केसरिया पिया ना,

यूपी में कहे का बा नेहवा
देखले आ बाबा क जलवा
जाई चकरा अन्हरो क नज़रिया पिया
मंगा द रंग केसरिया पिया ना,

चतुर्भुज---एक्सप्रेस हाईवे
 
                               शैल सिंह

होली गीत



गाल मलो ना गुलाल मोरे बांके रसिया
हँसेगी रूप देखी देखि  म्हारो सारी संखिया,

ना करो बरिजोरी ना कलईया मरोरो
भरी-भरी चूड़ी  हाथ कांच की ना तोरो
दूर बाट होती  रात बरसाने  घर मोरो
छोड़ो ना डगर यॆ  डरावे कारी रतिया
हँसेगी रुप…… ।

रैना अँधेरी बिजुरी चम-चम चमके
कैसे आऊं चोरी पायल छन-छनके
नन्द गली में ठाढ़े ग्वाले बन-ठनके
घर-घर होगी जाने कित-कित बतिया
हँसेगी ...............।

कारो-कारो बदरा बरस रह्यो रूम-झूम
जिया भरमावे है बंसुरिया मधुर धुन
छैल-छबीला करे जादू,टोना चुन-चुन
धीर नाहीं नींद नैना मारी गयी मतिया
हँसेगी ...............।

सोमवार, 1 सितंबर 2025

मीरा भजन

मैं तो चली वृन्दावन धाम 
जहां मेरे श्याम पिया का गांव 
कि आग लगे राणा तेरे महलों में -३
तूमने जो भेजा राणा विष का प्याला
पी गई हंस हंस रट गिरधर की माला
ना मैं चाहूं महला दुमहला अटारी
मन में तो बसा बस मेरा बनवारी 
राजपाट सब छोड़ छाड़कर
लाज शरम तोड़ निकले पांव ,कि आग लगे राणा------
मैं तो चली ------
लगी धुन श्याम की बन गई जोगन
रत हरि भजन में निमग्न मगन मन
कुछ लोग कहें मोहे पगली दीवानी 
देखो बावरी हो गई महलों की रानी 
ले कर करतल एकतारा भजूं श्याम 
गम नहीं दुनिया करे बदनाम,कि आग लगे राणा -----
मैं तो चली -------
मीरा कर गई जग में नाम अमर
भक्तिरस का निर्मल भाव परस कर
युगों-युगों तक सुमिरेगा हर प्राणी 
मीरा की प्रेमरस भीगी अमृत वाणी
मैं भी आई प्रभु तेरे शरण चरण में  
दे दो मुझको भी वृन्दावन ठांव
कि बसा के रखूं निस दिन नयनों में 
मैं तो चली वृन्दावन धाम 
जहां मेरे श्याम पिया का गांव 
कि आग लगे राणा तेरे महलों में -३




बुधवार, 26 जुलाई 2023

आजा घर परदेशी करती निहोरा 

आजा घर परदेशी करती निहोरा 

सावन  की  कारी  बदरिया  पिया 

तेरी यादों का विष पी  नागिन हुई ।


नाचें मयूरी मोर पर फहरा-फहरा 

पिउ-पिउ बोले वन पापी पपिहरा 

कुहुके कोयलिया हूक उठे हियरा

दहकावे तन-वदन निरमोही बदरा 

सावन की विरही  कजरिया पिया 

तेरी यादों का विष पी  नागिन हुई ।


सुध-बुध दिये सकल पिया बिसरा 

नैना से लोर ढूरे बहि जाये कजरा 

झूला न कजरी सखिन संग लहरा 

चिन्ता अंदेशा में काया गई पियरा

सावन की  टिसही सेजरिया पिया 

तेरी यादों का  विष पी नागिन हुई ।


बौरा बरसाये नभ झर-झर फुहरा 

सिहरे कलेजा भींजा जाये अंचरा 

भावे ना रूपसज्जा सिंगार गजरा 

आजा घर परदेशी करती निहोरा 

सावन की कड़के बिजुरिया पिया 

तेरी यादों का विष पी  नागिन हुई ।


उड़-उड़ बैइठे कागा छज्जे मुँड़ेरा 

चिट्ठी ना संदेश दे शूल चुभे गहरा 

बाबा सुदिन टार फेरि दिये कंहरा 

लागे ना नैहर में कंत बिना जियरा 

सावन की पिहके पिरितिया पिया 

तेरी यादों का  विष पी नागिन हुई ।

सर्वाधिकार सुरक्षित 

शैल सिंह 











शनिवार, 25 फ़रवरी 2023

लयवद्ध गीत मादक वसंत पर ठेठ भोजपुरी में वसन्त की महिमा का साक्षात् वर्णन                             

 

लयवद्ध गीत मादक वसंत पर 

ठेठ भोजपुरी में वसन्त की महिमा का साक्षात् वर्णन 
                            

करें बाग़ बगईचा सिंगार
सुदिनवां वसन्त ले अइले
खेतवा सेठानी लगे ओढ़ी धानी चुनरी 
परदेशी पीत सखी कंत घरे अइले ,

सुरमई साँझ लगे नववधू वसुधा
सूरजमुखी के बढ़ी गए बड़ा रुतबा
विलक्षण उपहार लेके अइले ऋतुराज
नवगंध,नवपल्लव,नवकुसुम,नवगात
हरी-भरी वादी में परकृति छेड़े सरगम
प्रणय निवेदन करि प्रेमी करें प्रहसन ,

सूखी-सूखी टहनी पे लदी गए पत्र दल 
अमुवा बऊराईल बउरि डार-डार 
मह-मह महके दिशा-दिशा महुवा
निमिया फुलाईलि गहबर झार 
गुन-गुन भंवरा करेला गुंजार 
देखि-देखि गांछी-गांछी फुलवा के हार ,

उड़ेला विहंग देखा खुले आसमनवा
सेमल नारंगी रंग रंगवले वदनवां 
टेढ़े-मेढ़े ढाक तन फूटीं भूरि कलियाँ
लाल,नवरंग में देखावेलं जवानियाँ
कैथा कुरूप लीपले ऋतू के प्रसाधन
वनवा विटप लागे जईसे सुहागन ,

पाते-पाते डारि-डारि कूके कोइलरिया 
रास-रंग में मगन नाचे मोरवा चिरईया  
बगुला उजर घूमे खेत-खलिहान में 
पपीहा की पिया रट गूंजे है जहान में 
रतिया चंदनिया सजावेले दूकान 
बड़ा नीक लागे मधुऋतु के विहान ,

भइलीं उन्मादी कस तितली,बरैया
मधुमक्खी लूटी रस लेलीं बलैया
हरियर झबला में लाल ठोर सुअवा
उड़ि-उड़ि बइठेला मकई के मुड़वा
लह-लह फसल निरेखेला किसान
जागि के अगोरे खेत डालि के मचान ,

पित वसन धारि ठसके सरसोईया 
गेंहुँवा क बाली झूमे सनकल केरईया 
चनवा जवानी चढ़ल सहकेले जईया 
मकई से रेस में रहर मोरी दईया 
डोलिया सजावे लागल पुरुवा बयार 
काटे चिटुकी ठिठोली करे पछुवा छिनार ,

झपसी-झपसी लहरावे चूल मौलश्री
दुवरा पर गमकेला हरसिंगार 
मेंहदी के पतवा से झहरेला ख़ुश्बू 
लचे चरर-मरर गरे लग बंसवार 
बबुल,शीशम के गाछ रिझ सुगुनी 
जले बुझे,उड़े सांझि-राते भगजुगुनी ,

कईसे कहीं लाज लागे कली कचनार
कांची उमर मुस्की बरछी कटार
मटके प्रभंजन पेन्हि घघरा लहरिया
काढ़ि रंग-बिरंग कसीदा किनरिया
पीपरा के पात पर डोले पुरईनिया
सगरी जहान लगे नई दुलहिनिया ,

पोतल लिपल देखि घर के देवाल
सुघड़ रंगोली खांचल मनवां निहाल
गउँवा की देहिया ग़जब चित्रकारी
कचरी,बड़ी सूखे पापड़ अंगना दुवारी
मड़ई के माथ पर सवार लौकी,कोंहड़ा
तोरई ,भिंडी चिंचिढ़ा लगवले जमवड़ा ,

लरके लतर देखा सेमिया के भार से
पलकी चौराई हँसे ओसिया के प्यार से
मधुमासी जोबना सवति जस लागे
जले भूने लाल रंग मरचा पोता के
धनिया ग़दर करे झझके पोदिनवा
गोभीया कनखि मारे मातल बैगनवा ,

टमाटर लाले अभरन में ढावेलीं गज़ब
करें मुरई अँइठी मूँछ खीरा से तलब
माछी बिछिलाय तरकरियन के अंग पर
तंज कसें खिसिया के करैला के ढंग पर
बेसर अस लागे सहजन के झुलनियाँ
बीन ,बोड़ो नाक लटकवलीं नथनियाँ ,

सोनचंपा के भीना गंध करे है बेहाल
खोलें विहँसी घूँघट पट गेंदा गुलाब
सुगन्धराज देखें अंग दरपन संवार के
रंगन,टगर काकुल ज़ुल्फी में काढ़ के
दिनवा बहुरले गईले भाग पतझार
गावें घट-घट हिली-मिली मंगलचार ,

जामुन सियावें लहंगा चोली छींटदार
कटहल ,बड़हल में भईल तक़रार
धतूरा,बेल,बईर के केतना रूआब बा
शिव रज चढ़ी मानो पवले सुराज बा
चंवर डोलवले ऋतुराज चहुँओर
छइलल नागफ़नी होईके विभोर ,

रातरानी झाँपि चलें अपनो अँचरवा
पगड़ी उछालें अढ़उलवा,कनेरवा
चम्पा,चमेली,बेला हँसे ठट्ठा मारि के
फूटलीं किरिन मांग भरी के सेनुरवा
ओस में नहाके निखरे दूब ,घसिया
मकरन्द चूस मस्त भये केत्ते रसिया ,

कशिया के भुवा खुलल भईल मुँहजोर
जोर नाहीं चले उड़े मन का चकोर
कुसुमी चदरिया के तानि के ओहार
टह-टह टेसू बरसे फाग के फुहार
हरषित सुहासित भइल मादक जवार
बुढ़वन पर चढ़ल जवानी के बोखार ,

करें बाग़ बगईचा सिंगार
सुदिनवां वसन्त ले अइले
खेतवा सेठानी लगे ओढ़ी धानी चुनरी 
परदेशी पीत सखी कंत घरे अइले । 

गुरुवार, 8 दिसंबर 2022

भोजपुरी आइटम गीत

कइले बा बदनाम हमें कमबख्त जवानी हो गईल
बांके नयन पर चढ़ल जोबन पर 
बिजुरी बदनवां हो गईल
कइले बा बदनाम हमें कमबख्त जवानी हो गईल ,

जबसे लागल साल सोलहवां राह चलल दुश्वार भईल 
दम-दम दमके चाँद सा मुखड़ा लोगन क बुरा हाल भईल
ना कवनों सिंगार ना मोतीयन के हार हुस्न गहनवां हो गईल 
कइले बा बदनाम हमें कमबख्त जवानी हो गईल ,

महुआ ऐसन गदरल जवानी जियरा के जंजाल भईल 
गाल गुलाबी नैन शराबी ओठ क लाली काल भईल 
बलखाती कमर पे तिरछी नजर पे कातिल कजरवा हो गईल
कइले बा बदनाम हमें कमबख्त जवानी हो गईल ,

मुड़-मुड़ के देखें मोहे बटोही मतवारी जब चाल भईल 
सीने से ढलके लाल दुपट्टा बाबा रे इ का हाल भईल 
नागिन सी लट पे अदा के झटके लट्टू जहनवा हो गईल
कइले बा बदनाम हमें कमबख्त जवानी हो गईल ।

शैल सिंह 


भजन " बनाओ ना बावरिया "

जमुना से गगरिया भर लाने दो -2
जमुना से गगरिया भर लाने दो श्याम
रोको ना डगरिया घर जाने दो रोको ----।

सांझ ढल आयी घिर आयी बदरिया
रात अँधेरी चमके चम-चम बिजुरिया 
छोड़ो ना कलईया,छोड़ो ना कलईया,घर जाने दो रोको --।

कारन तोरे संग छोड़ी सब गुजरिया
राह निरखती होगी मैया की नजरिया 
छोड़ो ना कन्हैया,छोड़ो ना कन्हैया घर जाने दो ---।

कोरी चुनरिया मोरी बारी उमरिया 
लागे डर अकेली कैसे जाऊँ घर संवरिया
पड़ूं तोरे पईंया,पड़ूं तोरे पईंया घर जाने दो ---।

जादू भरी अंखिया मन मोहरी बंसुरिया 
करो ना विवश मोहे बनाओ ना बावरिया 
होगी बदनामी सैंया,होगी बदनामी घर जाने दो---।

शैल सिंह 






भजन " राधा भई है बावरिया "

मधुसूदन मथुरा में छाये राधा ताकती डगरिया 
ले लो ना खबरिया स्वामी ले लो ना खबरिया ,

गायें,गलियां,गोपी,ग्वाले पूछें हाल तेरा 
बेहाल ब्रज के वासी बेचैन हाल मेरा 
सूना जमुना तट सूनी कदम छांव डरिया 
ले लो ना खबरिया स्वामी ले लो ना खबरिया ,

बोले ना कलाई कंगना बोले ना पैंजणियां
तुम बिन जमुना सूखी कैसे भरूँ पनियां
कांहे बरसाये नेहा बजाये क्यों बंसुरिया 
ले लो ना खबरिया स्वामी ले लो ना खबरिया ,

कांहे हँसी प्रीत मोसे लगाये मन मोहना
कुञ्ज संवरिया देखि राधा का भूले अंगना 
रोती हैं गुजरिया सारी राधा भई है बावरिया 
ले लो ना खबरिया स्वामी ले लो ना खबरिया ।

शैल सिंह 

भजन " मुदित मन से दोनों नाम,राम श्याम भज ले "

भज ले रे मनवां हरिनाम भज ले 
सियाराम भज ले राधेश्याम भज ले
मुदित मन से दोनों नाम,राम श्याम भज ले 
सियाराम भज ले,राधेश्याम भज ले,भज ले रे ----।

परनिन्दा,परित्याग कर अप्रिय वचन न बोल मन 
सत्य और निष्ठा की डगर पर बस तूं चल रे मन 
घट-घट में मिलेंगे रामश्याम भज ले
सियाराम भज ले,राधेश्याम भज ले,भज ले रे ----।

मद,लोभ,काम,क्रोध,ईर्ष्या,द्वेष,राग छोड़ मन
सद्गुणों को अंगीकार कर,दुर्गुणों से मुक्ति ले रे मन
साधना आराधना में रामश्याम भज ले
सियाराम भज ले,राधेश्याम भज ले,भज ले रे ----।

करले निर्मल अन्तर्मन आचरण को करले पावन
नियम,धर्म,संयम का जीवन में करले पालन 
लक्ष्य होंगे सिद्ध सारे रामश्याम भज ले
सियाराम भज ले,राधेश्याम भज ले,भज ले रे ----।

शैल सिंह 







शिव भजन

भोले शंकर का सजा दरबार 
चलो री सखी देखन चलो
अद्भुत छटा बेमिसाल 
चलो री सखी देखन चलो
लगी भीड़ है अपरम्पार 
चलो री सखी देखन चलो ।

आया तेरे दर पर तेरी दरश को
भूखा,लंगड़ा,लाचार
चलो री सखी देखन चलो,भोले शंकर का ----।

भांग चढ़ावें सब नर नारी
शिवजी लुटावें प्यार
चलो री सखी देखन चलो,भोले शंकर का ----।

कोई बजावे ढोल,मंजीरा
कोई झूम के गावे मल्हार 
चलो री सखी देखन चलो,भोले शंकर का ----।

गौरी शिवशंकर लगें अलबेला
सारी अँखिया हैं अपलक निहार 
चलो री सखी देखन चलो,भोले शंकर का ----।

शैल सिंह 

मंगलवार, 6 दिसंबर 2022

कन्हैया भजन

मैया तेरो कृष्ण कन्हैया नटखट बड़ा शैतान 
फोड़ दी मटकी खा गयो माखन बड़ा कियो रे परेशान 
छिपा है कहाँ बता शैतान --2

जमुना किनारे वंशी बजाना बैठ कदम की डरियन पे
गउवा चराना निरा बहाना चीर चुराना छोरियन के 
सब सखियाँ मनुहार करें बड़ा कियो रे हैरान
छिपा है कहाँ बता शैतान --2

नन्दलाल तेरो बड़ा उत्पाती रार करे ब्रज गलियन में
ग्वाल बाल संग शोख शरारत रास रचावे गोपियन में
कैसी-कैसी लीला ठग की तूं बड़ी बनो रे अनजान 
छिपा है कहाँ बता शैतान --2

पकड़ गई चितचोर की चोरी मुख माखन लिपटा दधियन से
कान पकड़ कान्हा भरमाते आँसू भरि-भरि अँखियन से
मैं बालक बहियन को छोटो बड़ा बनो रे नादान 
छिपा है कहाँ बता शैतान --2

श्याम भजन

कैसा जादू है तुझमें सांवरिया
तेरी चाहत में हो गई बवरिया 

जमुना किनारे जल भरने के बहाने
गई श्याम आओगे गउवा चराने 
बेख़याली में डूबी गगरिया 
मैं तो हो गई बवरिया,कैसा जादू है ---।

थिरकने लगे पांव मुरलीधर की धुन पे
कैसै ना झूमूँ मधुर तान सुनके
बेशरम छन से टूटी पयलिया 
मैं तो हो गई बवरिया,कैसा जादू है ---।

कहाँ जा छुपे हो नटखट कन्हैया
नगर-डगर ढूंढ़े है यशोमती मैया
कितनी बेचैन ब्रज की गुजरिया
मैं तो हो गई बवरिया,कैसा जादू है ---।

तुम्हारी कसम अब ना चुगली करेंगे
माखन मलैया भरि मटकी रखेंगे 
जरा फिर से बजा दो बंसुरिया
मैं तो हो गई बवरिया,कैसा जादू है ---।

शैल सिंह 

हमरो पिया परदेशिया रिसाई गईले ना

अईंली आधी रात सेजिया 
लागी गउवे निंदिया 
रिसाई गईले ना हमरो पिया परदेशिया रिसाई गईले ना----

बहुत दिननवां पे पिया घरे अइले
दिनवां बितवले कइसों सांझि के बोलवले
ऐसन बवाल बाड़ी ससुई ननदिया    
रिसाई गईले ना हमरो पिया परदेशिया रिसाई गईले ना---

अबहीं अघाई के ना कवनो भइलीं बतिया 
रूसले मनवले में बीति गइल रतिया
केतनों डोलाईं हम रस-रस बेनिया
रिसाई गईले ना हमरो पिया परदेशिया रिसाई गईले ना---   

कांची उमरिया में गवना ले अइले
बारी बा उमर अबहीं बाबूजी बतवले 
होत भिनुसार दिन लेके अईले भईया 
रिसाई गईले ना हमरो पिया परदेशिया रिसाई गईले ना---

डोलिया कंहरवा दुवरवे पे रहले
भईले निर्मोही बिना बोलले चलि गईले 
कईसे बुझाई अपने हियवा के अगिया 
रिसाई गईले ना हमरो पिया परदेशिया रिसाई गईले ना---

एक झलक जो देखा उनको

मन को भा गई सांवली सुरतिया 
मैं तो हुई बावरी सखी 
जाने कब होगी उनसे प्यारी बतिया 
मैं तो हुई बावरी सखी ।

आते-जाते उनसे मुलाकात बस हुई
आँखों-आँखों में ही सिर्फ बात बस हुई
सपनों में मेरे रोज-रोज मेरे आने है लगा
रोम-रोम मेरा गुदगुदाने है लगा,

जाग-जाग के बिताई सारी रतिया
मैं तो हुई बावरी सखी 
जाने कब होगी उनसे प्यारी बतिया 
मैं तो हुई बावरी सखी ।

शाम से हूँ बैठी घर का खोल झरोखा
इक झलक की चाह वो है सबसे अनोखा
धड़कनों को छेड़ा है नाजो अंदाज ने
खुश्बू की तरह छाया है जां ओ जहान में,

डगर-डगर पर बिछाई दोनों अंखिया
मैं तो हुई बावरी सखी 
जाने कब होगी उनसे प्यारी बतिया 
मैं तो हुई बावरी सखी ।

पूछता जमाना क्या हुआ है जानेमन
क्यों नैना खोये-खोये चाल-ढाल बांकपन
इक नजर के जादू की है ये दीवानगी
दिल्लगी के माजरा की ये रवानगी,

राजे दिल की छिपाई सबसे बतिया
मैं तो हुई बावरी सखी 
जाने कब होगी उनसे प्यारी बतिया 
मैं तो हुई बावरी सखी ।






बिन तेरे ओ सजना

बिन तेरे ओ सजना मेरा फीका चूड़ी कंगना
बिन तेरे ओ बलमा मेरा सूना घर ये अंगना
भला कैसे सावन का मजा आयेगा रब्बा
कोई तो बता दे आके कोई समझा दे ,रब्बा --- 

पल-पल तेरी याद सताये अधरों पे बस पिया-पिया
पपिहा पी पी बोले ,कुहुके कोयल बगिया
सारी-सारी रातें जागूँ नींद ना आये अँखिया
पगली कहते लोग मुझे बावली हो गई छलिया

बिन तेरे ओ सजना डंसती काली रैना
बिन तेरे ओ बलमा भाये ना कजरा नैना
भला कैसे सावन का मजा आयेगा रब्बा
कोई तो बता दे आके कोई समझा दे ,रब्बा --- 

सास ससुर की बोली लगे कलेजे गोली
ननद छिछोरी ना जाने कब जायेगी डोली
डर के मारे भागती छिपती देवरा करे ठिठोली
पकड़ कलाई छेड़े हरदम पाके मुझे अकेली 

बिन तेरे ओ सजना कैसा सिंगार औ गहना
बिन तेरे ओ बलमा इस घर मैं कैसे रहना
भला कैसे सावन का मजा आयेगा रब्बा
कोई तो बता दे आके कोई समझा दे ,रब्बा --- 



'' भजन ''

  '' भजन ''   

भगवन तुम तो बसे हो मन-मन्दिर
ईंट-पत्थरों के शिवाले क्यूँ जाऊँ
जब मन के नगर में तेरा महल
क्यूँ चौखट-चौखट सर टकराऊँ ,

तेरा रूप धार ली काया मेरी
प्रतिदिन अंग भभूत लगाऊँ
रच-बस गए हो प्रभु तुम मुझमें
नख-शिख रोम-रोम सुख पाऊँ ,

याचनाओं का अर्ध्य भेंट दी
दु:ख का मृगछाल बिछाऊं
निशि-वासर हूँ लीन भजन में
दीन-दशा का भोग चढ़ाऊँ ,

तेरे पांव पखारें नीर नयन के
दुःख की गागर छलकाऊँ
कहीं छवि ओझल ना जाये
डर से पलकें ना झपकाऊँ ,

तुम ध्यान मग्न मेरे उर गह्वर में
क्यूँ गुफ़ा कंदरा मन भटकाऊँ
जब मुझमें समाहित तुम प्रभुवर
क्यूँ दर-दर की जा ठोकर खाऊँ ,

एक बार नज़र तूं फेरे इधर
क्यूँ मन्दिरों की घण्टी खटकाऊँ
जब नज़रबन्द कर लिया तुझे
दिन रात दरश तेरा पाऊँ ,

                      शैल सिंह


मंगलवार, 4 अक्टूबर 2022

गीत

बैरी पूरवा के झोंके से उड़ी है चुनरिया
हाय दईया खुल गई लाज की गठरिया
अनजानी राह दूर घर है बखरिया 
हा दईया घूरती हैं जालिम नजरिया

सोलहवें साल की बाली उमरिया
जाम जैसे छलके है तन की गगरिया
मनचले छोरे छेड़ें चलती डगरिया 
हा दईया घूरती हैं जालिम नजरिया,

छम-छम निगोड़ी बाजे पांव की पयलिया
बलखाती चाल मोरी झनके झांझरिया
चाँद जैसा मुखड़ा उसपे रूप की बजरिया
हा दईया घूरती हैं जालिम नजरिया,

नादानी में सजके निकली शहरिया
हल्ला-हल्ला शोर हुआ गिरती बिजुरिया
कुड़ी गांव की मैं अल्हड़ अजूबा नगरिया
हा दईया घूरती हैं जालिम नजरिया,

लागे शरम कैसे जाऊं ओसरिया
मेला लगाये लोग बइठे दुवरिया
आग जैसे फैल गई छोटी सी खबरिया
हा दईया घूरती हैं जालिम नजरिया ।