गुरुवार, 8 दिसंबर 2022

शिव भजन

भोले शंकर का सजा दरबार 
चलो री सखी देखन चलो
अद्भुत छटा बेमिसाल 
चलो री सखी देखन चलो
लगी भीड़ है अपरम्पार 
चलो री सखी देखन चलो ।

आया तेरे दर पर तेरी दरश को
भूखा,लंगड़ा,लाचार
चलो री सखी देखन चलो,भोले शंकर का ----।

भांग चढ़ावें सब नर नारी
शिवजी लुटावें प्यार
चलो री सखी देखन चलो,भोले शंकर का ----।

कोई बजावे ढोल,मंजीरा
कोई झूम के गावे मल्हार 
चलो री सखी देखन चलो,भोले शंकर का ----।

गौरी शिवशंकर लगें अलबेला
सारी अँखिया हैं अपलक निहार 
चलो री सखी देखन चलो,भोले शंकर का ----।

शैल सिंह 

मंगलवार, 6 दिसंबर 2022

कन्हैया भजन

मैया तेरो कृष्ण कन्हैया नटखट बड़ा शैतान 
फोड़ दी मटकी खा गयो माखन बड़ा कियो रे परेशान 
छिपा है कहाँ बता शैतान --2

जमुना किनारे वंशी बजाना बैठ कदम की डरियन पे
गउवा चराना निरा बहाना चीर चुराना छोरियन के 
सब सखियाँ मनुहार करें बड़ा कियो रे हैरान
छिपा है कहाँ बता शैतान --2

नन्दलाल तेरो बड़ा उत्पाती रार करे ब्रज गलियन में
ग्वाल बाल संग शोख शरारत रास रचावे गोपियन में
कैसी-कैसी लीला ठग की तूं बड़ी बनो रे अनजान 
छिपा है कहाँ बता शैतान --2

पकड़ गई चितचोर की चोरी मुख माखन लिपटा दधियन से
कान पकड़ कान्हा भरमाते आँसू भरि-भरि अँखियन से
मैं बालक बहियन को छोटो बड़ा बनो रे नादान 
छिपा है कहाँ बता शैतान --2

श्याम भजन

कैसा जादू है तुझमें सांवरिया
तेरी चाहत में हो गई बवरिया 

जमुना किनारे जल भरने के बहाने
गई श्याम आओगे गउवा चराने 
बेख़याली में डूबी गगरिया 
मैं तो हो गई बवरिया,कैसा जादू है ---।

थिरकने लगे पांव मुरलीधर की धुन पे
कैसै ना झूमूँ मधुर तान सुनके
बेशरम छन से टूटी पयलिया 
मैं तो हो गई बवरिया,कैसा जादू है ---।

कहाँ जा छुपे हो नटखट कन्हैया
नगर-डगर ढूंढ़े है यशोमती मैया
कितनी बेचैन ब्रज की गुजरिया
मैं तो हो गई बवरिया,कैसा जादू है ---।

तुम्हारी कसम अब ना चुगली करेंगे
माखन मलैया भरि मटकी रखेंगे 
जरा फिर से बजा दो बंसुरिया
मैं तो हो गई बवरिया,कैसा जादू है ---।

शैल सिंह 

हमरो पिया परदेशिया रिसाई गईले ना

अईंली आधी रात सेजिया 
लागी गउवे निंदिया 
रिसाई गईले ना हमरो पिया परदेशिया रिसाई गईले ना----

बहुत दिननवां पे पिया घरे अइले
दिनवां बितवले कइसों सांझि के बोलवले
ऐसन बवाल बाड़ी ससुई ननदिया    
रिसाई गईले ना हमरो पिया परदेशिया रिसाई गईले ना---

अबहीं अघाई के ना कवनो भइलीं बतिया 
रूसले मनवले में बीति गइल रतिया
केतनों डोलाईं हम रस-रस बेनिया
रिसाई गईले ना हमरो पिया परदेशिया रिसाई गईले ना---   

कांची उमरिया में गवना ले अइले
बारी बा उमर अबहीं बाबूजी बतवले 
होत भिनुसार दिन लेके अईले भईया 
रिसाई गईले ना हमरो पिया परदेशिया रिसाई गईले ना---

डोलिया कंहरवा दुवरवे पे रहले
भईले निर्मोही बिना बोलले चलि गईले 
कईसे बुझाई अपने हियवा के अगिया 
रिसाई गईले ना हमरो पिया परदेशिया रिसाई गईले ना---

एक झलक जो देखा उनको

मन को भा गई सांवली सुरतिया 
मैं तो हुई बावरी सखी 
जाने कब होगी उनसे प्यारी बतिया 
मैं तो हुई बावरी सखी ।

आते-जाते उनसे मुलाकात बस हुई
आँखों-आँखों में ही सिर्फ बात बस हुई
सपनों में मेरे रोज-रोज मेरे आने है लगा
रोम-रोम मेरा गुदगुदाने है लगा,

जाग-जाग के बिताई सारी रतिया
मैं तो हुई बावरी सखी 
जाने कब होगी उनसे प्यारी बतिया 
मैं तो हुई बावरी सखी ।

शाम से हूँ बैठी घर का खोल झरोखा
इक झलक की चाह वो है सबसे अनोखा
धड़कनों को छेड़ा है नाजो अंदाज ने
खुश्बू की तरह छाया है जां ओ जहान में,

डगर-डगर पर बिछाई दोनों अंखिया
मैं तो हुई बावरी सखी 
जाने कब होगी उनसे प्यारी बतिया 
मैं तो हुई बावरी सखी ।

पूछता जमाना क्या हुआ है जानेमन
क्यों नैना खोये-खोये चाल-ढाल बांकपन
इक नजर के जादू की है ये दीवानगी
दिल्लगी के माजरा की ये रवानगी,

राजे दिल की छिपाई सबसे बतिया
मैं तो हुई बावरी सखी 
जाने कब होगी उनसे प्यारी बतिया 
मैं तो हुई बावरी सखी ।






बिन तेरे ओ सजना

बिन तेरे ओ सजना मेरा फीका चूड़ी कंगना
बिन तेरे ओ बलमा मेरा सूना घर ये अंगना
भला कैसे सावन का मजा आयेगा रब्बा
कोई तो बता दे आके कोई समझा दे ,रब्बा --- 

पल-पल तेरी याद सताये अधरों पे बस पिया-पिया
पपिहा पी पी बोले ,कुहुके कोयल बगिया
सारी-सारी रातें जागूँ नींद ना आये अँखिया
पगली कहते लोग मुझे बावली हो गई छलिया

बिन तेरे ओ सजना डंसती काली रैना
बिन तेरे ओ बलमा भाये ना कजरा नैना
भला कैसे सावन का मजा आयेगा रब्बा
कोई तो बता दे आके कोई समझा दे ,रब्बा --- 

सास ससुर की बोली लगे कलेजे गोली
ननद छिछोरी ना जाने कब जायेगी डोली
डर के मारे भागती छिपती देवरा करे ठिठोली
पकड़ कलाई छेड़े हरदम पाके मुझे अकेली 

बिन तेरे ओ सजना कैसा सिंगार औ गहना
बिन तेरे ओ बलमा इस घर मैं कैसे रहना
भला कैसे सावन का मजा आयेगा रब्बा
कोई तो बता दे आके कोई समझा दे ,रब्बा --- 



'' भजन ''

  '' भजन ''   

भगवन तुम तो बसे हो मन-मन्दिर
ईंट-पत्थरों के शिवाले क्यूँ जाऊँ
जब मन के नगर में तेरा महल
क्यूँ चौखट-चौखट सर टकराऊँ ,

तेरा रूप धार ली काया मेरी
प्रतिदिन अंग भभूत लगाऊँ
रच-बस गए हो प्रभु तुम मुझमें
नख-शिख रोम-रोम सुख पाऊँ ,

याचनाओं का अर्ध्य भेंट दी
दु:ख का मृगछाल बिछाऊं
निशि-वासर हूँ लीन भजन में
दीन-दशा का भोग चढ़ाऊँ ,

तेरे पांव पखारें नीर नयन के
दुःख की गागर छलकाऊँ
कहीं छवि ओझल ना जाये
डर से पलकें ना झपकाऊँ ,

तुम ध्यान मग्न मेरे उर गह्वर में
क्यूँ गुफ़ा कंदरा मन भटकाऊँ
जब मुझमें समाहित तुम प्रभुवर
क्यूँ दर-दर की जा ठोकर खाऊँ ,

एक बार नज़र तूं फेरे इधर
क्यूँ मन्दिरों की घण्टी खटकाऊँ
जब नज़रबन्द कर लिया तुझे
दिन रात दरश तेरा पाऊँ ,

                      शैल सिंह