सोमवार, 1 सितंबर 2025

मीरा भजन

मैं तो चली वृन्दावन धाम 
जहां मेरे श्याम पिया का गांव 
कि आग लगे राणा तेरे महलों में -३
तूमने जो भेजा राणा विष का प्याला
पी गई हंस हंस रट गिरधर की माला
ना मैं चाहूं महला दुमहला अटारी
मन में तो बसा बस मेरा बनवारी 
राजपाट सब छोड़ छाड़कर
लाज शरम तोड़ निकले पांव ,कि आग लगे राणा------
मैं तो चली ------
लगी धुन श्याम की बन गई जोगन
रत हरि भजन में निमग्न मगन मन
कुछ लोग कहें मोहे पगली दीवानी 
देखो बावरी हो गई महलों की रानी 
ले कर करतल एकतारा भजूं श्याम 
गम नहीं दुनिया करे बदनाम,कि आग लगे राणा -----
मैं तो चली -------
मीरा कर गई जग में नाम अमर
भक्तिरस का निर्मल भाव परस कर
युगों-युगों तक सुमिरेगा हर प्राणी 
मीरा की प्रेमरस भीगी अमृत वाणी
मैं भी आई प्रभु तेरे शरण चरण में  
दे दो मुझको भी वृन्दावन ठांव
कि बसा के रखूं निस दिन नयनों में 
मैं तो चली वृन्दावन धाम 
जहां मेरे श्याम पिया का गांव 
कि आग लगे राणा तेरे महलों में -३